The Rebel Tales...

...Coming across different shades of life, compels to think in more colours... dream in many worlds! So, my posts reflect that departure n variation!

तेरा वैभव अमर रहे माँ,
हम दिन चार रहें रहें..


- अमित श्रीवास्तव
(चित्र: webduna से साभार)

उगते सूरज को शीश नवाते हैं
जिससे कुछ मिल जाए, उसकी गाते हैं.
जो अस्त होता है उसे चिढ़ाते है.

सत्य क्या और नैतिकता क्या,
जो सत्तासीन है उसकी सब गातें हैं
यह अब सर्वमान्य नियम है,
काम हो तो सब भातें हैं.

समाज कि क्या यही नियति है?
कि जिसके दिन हैं उसकी रातें हैं?!
ध्यान दें, यहाँ सब चलता है,
शेष तो कहने सुनने कि बातें हैं।

९ अगस्त २००९
© अमित Amit

एक बार फिर से मैं उसी सड़क पर हूँ..
जिसके सफ़र का कोई छोर नहीं!
बस चौराहे ही हैं, राहगीर कोई और नहीं.
ठिठकता हूँ हर बार कि मंजिल पास है शायद
मील के पत्थर का कोई जोर नहीं.
हर बार कि तरह इस बार भी,
मुझे पता नहीं किधर जाना है
कोई सराय नहीं... कोई ठौर नहीं.

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Personal Blog of Amit Srivastava about life, current affairs, policies and politics in India, self-help opinions and inspiring articles. The Author is known for bold and decisive opinion about society, politics and diplomacy.
This blog also contents some of the poems and spiritual discoveries by the author.

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New Delhi, Delhi, India
I am researcher, academician, activist and occasional writer. Some times I also play a role of technician. A poet as well.:) visit my page http://amitsrivastava.tk

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