Friday, December 19, 2014

बलिदान दिवस - बिस्मिल, अशफाक़ और रोशन सिंह की याद में।

कुछ युवकों के अदम्य साहस ने विश्व-विजयी (जैसा की उनका दावा था) अंग्रेज़ो को उनकी औकात बता दी थी। काकोरी में खजाने वाली ट्रेन ही नहीं, बल्कि अंग्रेजों के दंभ की इज्ज़त भी लूटी गयी थी। अंग्रेज़ कायरों ने भारत माता के सपूतों रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ुल्लाह खान और ठाकुर रोशन सिंह को आज ही के दिन, सान 1927 में फांसी दिया था। इस कांड के चौथे योद्धा थे राजेंद्र प्रसाद लाहिड़ी जिन्हे दो दिनों पहले ही यानी 17 दिसंबर को सरकार ने गोंडा जेल में फांसी दे दी थी।


भारत के इन चार अमर बलिदानियों को कोटिशः नमन। आज जब देश आजाद है, कुछ खानदानों और कुछ व्यक्तियों ने ही इतिहास के सभी पन्नों पर कब्जा कर लिया है। अफसोस और शर्मनाक बात है कि इन शहीदों के नाम पर देश के शायद किसी शहर में कोई सड़क या मोहल्ला हो। ऐसे वीर सपूतों को भुला देने वाला राष्ट्र अपनी आज़ादी भी किसी दिन भुला देगा।
      मुझे याद है, कि जब मैं  स्कूल में था तब हिन्दी की किताब में ठाकुर रोशन सिंह कि फाँसी, उनकी आर्थिक दशा और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर एक कहानी थी। उसी माध्यम से मैंने रोशन सिंह जी को पहली बार जाना था। संयोग से एक दिन मैंने अभी की उसी वर्ग की पुस्तक देखा। रोशन सिंह और चन्द्रशेखर आज़ाद की कहानियाँ गायब थी, और पाकिस्तानी कठमुल्ले की झूठी भारत-प्रेम की कहानी प्रमुखता से थी। इस प्रकार, पिछले दस साल के विदेशी शासन ने पूरी एक पीढ़ी को न केवल अपने स्वतन्त्रता सेनानियों से दूर किया बल्कि उसे एक शत्रु-राष्ट्र के प्रति सहानुभूति भरा भी बना दिया।
 हमे इस ज्वलंत प्रश्न को लोगों तक पहुंचाना है... क्या आप हमारे साथ हैं? 
वंदे मातरम!

Friday, December 12, 2014

आज हाइकू लिख रहा हूँ।



मुखौटे पहने लोग,
खोजते अपनी खुशियाँ,
शख्सियत से बड़ी परछाइयाँ।

***

मैंने नेह निचोड़ा इसमें,
गागर में सागर भर लाया,
हर चितवन में तुमको पाया।

***

शरदीय चंद्र की शीतलता में, 
निशा की गहरी व्याकुलता में,
मन-मंदिर में किसकी काया!

***


वास्तविकता एक भ्रम या सत्य,
सत्य एक कल्पना या अर्थ,
अर्थ एक मूर्त या निरंकार। 


... १२ दिसम्बर २०१२, लखनऊ

Wednesday, December 10, 2014

World Hindu Congress, 2014 - A dream that turned in to reality.

This year has been fulfilling year so far. Our well desired government is at center, India getting prominence in the world. And new visions on development, diplomacy and security are coming afore.
 World Hindu Congress is brainchild of great visionary Swami Vigyananand ji. He conceptualized it in 2009, and presented in VHP-ICM Meet, Mumbai 2010.
And Finally last month the imagination and concept became the reality: When 1800 Hindus from 53 countries, heed the call of “Sangachchhadhwam Samvadadhwam” (Step together, Express together), and converge to put their combined constructive and positive energy together, the event had to be historic for Hindu rise and resurgence.
This happened from 21-23 November 2014 when delegates from around the world gathered
to deliberate the future for a better world at the First World Hindu Congress, through the universal Hindu values and pluralism, in New Delhi, Bharat. Seven conferences, 45 sessions, and 196 speakers provided the opportunity to discuss numerous issues affecting Hindu society and formulate appropriate pan of action.
Event related Press Release is here: http://bitl.ly/WHCPress
Swami ji has given me the responsibility of Social Media cordinator to the event, with dedicated volunteers like Srini, Liza, Sanjay, Deepak and Sunanda we did well and the resonance of #HinduRise became global. I chaired a session in Youth Conference too.



The WHC was a great experience and lessons learnt during the even would be going to be very useful for the coming organizations. :)

Jai Shri Ram!