Tuesday, November 11, 2008

अंतरमन के कोमलतम पर

अंतरमन के कोमलतम पर
कल्पित नाम लिखा रखा है;
रंग बिरंगे उन सपनों का,
प्रीतम दीप जला रखा है

अमूर्त कल्पना के मुक्त सुरों का
सुंदर लय-ताल बना रखा है
मधुर क्षणों के पंखुडियों का
कोमल सेज सजा रखा है।
(व्यक्तिगत् डाइयरी से कविता का एक अंश)

© अमित Amit

1 comment:

Mukesh Kumar Sinha said...

khubsurat panktiyan.......:)