Saturday, February 13, 2010

कुछ जिंदगी और सही, कुछ चिराग और सही!

बार बार तुमने मेरे दिल को दहलाया,
मैं अनाड़ी, फिर भी तुझे दिल से लगाया...
अमन की आश में अपनों को गवांया,
और मुहब्बत करने तुझे फिरसे बुलाया

रकीबों के रहमत पर मेरी जिंदगी है,
सब समझ कर भी उनको मिलने बुलाया,
कुछ जिंदगी और सही, कुछ चिराग और सही,
इस दीवानगी में क्या नहीं लुटाया.

दुनिया की बातों का भरम है मुझको,
इस शर्म-ए-सार में तुझे दिल से लगाया.
बीते कल को भुला, अमन की भीख माँगा था,
बदले में फिर से अपनों का खून बहाया.

1 comment:

Sucheta said...

'बीते कल को भुला, अमन की भीख माँगा था'

baar baar thokar khaa kar bhi hum prem ka paath kab tak sikhate rahenge in jahillon ko
sikhaya usko jaata hai
jo seekhna chaahe

a student is one who has
that humble attitude for learning,
it is our stupidity
we are trying to teach an ADHD tamper throwing toddler about love