Tuesday, June 22, 2010

तुम्हे आना है तो आ जाना

तुम्हे आना है तो आ जाना,
वरना सूने दिन और उदास राते हैं,
चिंता कल की है,
और भी मनहूस बातें हैं.


जहर है इन हवाओं में,
लोगों में भी जज्बा कम है.
यूँ तो सब कुछ है सबके पास,
हर दिल में एक ही गम है.
ना आओगे तो भी रातें कट जाएगी
मेरा जलना ही कहाँ कम है.


या फिर चलो तुम अपनी राह
तुम्हारे पास और भी बातें हैं
हम तो ऐसे ही दीवाने हैं
अपनी तो ऐसे दिन और ऐसी ही रातें हैं.


© अमित Amit
  २३ जून २०१०

3 comments:

Anonymous said...

जाने की आस में भूल जाते हैं अपनी उदासी
फिर सोच कर रुक जाते हैं कहाँ मिलेगी यह बर्बादी
कहने दो सबको ,सबके पास वक्त कम हैं
और किस के पास जुबान तो किसी के पास दर्द कम हैं
राहें बहुत हैं और आरज़ू भी नम नहीं
इस ज़िन्दगी में बस एक हमराज़ कहीं गुम हैं

sanu shukla said...

जहर है इन हवाओं में,
लोगों में भी जज्बा कम है.
यूँ तो सब कुछ है सबके पास,
हर दिल में एक ही गम है.
ना आओगे तो भी रातें कट जाएगी
मेरा जलना ही कहाँ कम है.


बहुत ही उम्दा भाई जी ....!!

Anonymous said...

कहाँ जाए ,क्या करे
कुछ समझ नहीं आता है
जिंदगी की कड़ी धूप
कोई साया नहीं पाता है