Friday, May 1, 2009

दुआ माँगी तो दर्द मिला

दुआ माँगी तो दर्द मिला,
बहार निकले तो मौसम सर्द मिला.
चाह थी दुनिया भर के प्यार की,
मतलब के लोग मिले और
प्यार का आसमान जर्द मिला.
यूँ ही दरियादिल बनने चला था मैं,
मुझे जो भी मिला, खुदगर्ज़ मिला!


- अमित श्रीवास्तव, १ मई २००९


I did ask for blessings (English translation by author himself.)
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I did ask for blessings, but received only pain.
when I came out, the weather got cold.
I was trying to spread the love around the world,
Got the people of means,
Found the livid sky of love.
I just came to make the flush of affection,
In response what I got; got selfish!

- Amit Srivastava, 1st May 2009

© अमित Amit

2 comments:

shishir said...

दुआ मांगी ये तो ठीक था पर इतनी क्यों मांगी की तुझे दर्द मिले
बाहर निकले ये तो ठीक था पर तब क्यों निकले जब मौसम बहुत सर्द था
बहुत चाहा थातुमने दुनिया से इसी लिए तुम्हें प्यार का आस्मां जर्द मिला
लगाना था तुझे दिल तो दरिया बहाने चला तू मेरे यार
ये तेरी ग़लतफ़हमी हैं की जो भी तुझे मिला खुद गरज मिला
गलती तेरी हैं की जब भी तुने कुछ किया वक़्त के पैमाने न ध्यान में रखा मेरे यार.

Surabhi Jain said...

u r too good Amit...